मुक्तक : 949 - तक़दीर


पार जो करता हमें ख़ुद डूब वो बजरा गया रे ;
अब अगर होगा लिखा तक़दीर में लगना कनारे -
तो यक़ीनन ग़र्क़े दरिया हों कि उससे पहले आकर ,
देखना तिनके बचा लेंगे हमें देकर सहारे ।।
( बजरा = बड़ी नाव , कनार = तट , ग़र्क़े दरिया = नदी में डूबना )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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