मुक्तक : 939 - ख़ैरात में


चमचमाते दिन में ना 
भूले भी काली रात में ।।
क़र्ज़ में हरगिज़ नहीं , 
बिलकुल नहीं सौग़ात में ।।
मुझपे गर दिल आये तो ही 
मुझसे करना प्यार तू , 
लूटना है दिल तेरा , 
पाना नहीं ख़ैरात में ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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