मुक्तक : 926 - आँधी


आज फिर याद की ऐसी आँधी चली ।।
बुझ चुकी थी जो दिल में वो आतिश जली ।।
मुद्दतों बाद फिर तुम जो आए नज़र ,
इश्क़ ने मुझ में फिर दी मचा खलबली ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (15-10-2019) को     "सूखे कलम-दवात"  (चर्चा अंक- 3489)   पर भी होगी। 
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
धन्यवाद । शास्त्री जी ।
Kavita Rawat said…
बहुत सुन्दर प्रस्तुति
धन्यवाद । कविता रावत जी ।
बहुत सुंदर सृजन।
धन्यवाद । मन की वीणा ।
Rohitas ghorela said…
कुछ यादों को हम अचेतन मन तक ले जा नहीं सकते।
खलबली है खलबली।
पधारें 👉👉  लोग बोले है बुरा लगता है
धन्यवाद । रोहितास जी ।

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