मुक्तक : 916 - झक


उनके लिए जो मारते हैं झक अभी भी हम ?
समझे नहीं ये बात आज तक , अभी भी हम ।।
उनको नहीं सुहाते फूटी आँख हम मगर !
उनको ही ताकते हैं एकटक अभी भी हम ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (04-09-2019) को "दो घूँट हाला" (चर्चा अंक- 3448) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
धन्यवाद । शास्त्री जी ।

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