सेल्फ़ी


सब वफ़ादारी मेरी फिर आपकी , 
सिर्फ़ अपनापन ज़रा सा दीजिए ।।
ख़ूबसूरत मैं भी हूँ मुझ पर अगर , 
प्यार से अपनी नज़र इक कीजिए ।।
कुछ नहीं सचमुच नहीं कुछ आज बस , 
चाहता हूँ आप अपने हाथ से ,
सेल्फ़ी तो ख़ूब खींचीं आपने , 
इक मेरी तस्वीर भी ले लीजिए ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (27-07-2019) को "कॉन्वेंट का सच" (चर्चा अंक- 3409)) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
धन्यवाद । शास्त्री जी ।
धन्यवाद । गगन शर्मा जी ।

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