मुक्त मुक्तक : 897 - मैं कहाँ हूँ ?


दिख रहा सबको वहीं बैठा जहाँ हूँ ।।
हूँ वहीं पर वाँ मगर सचमुच कहाँ हूँ ?
दिल मेरा आवारगी करता जिधर है ,
दरहक़ीक़त मैं यहाँ कब ? मैं वहाँ हूँ ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (07-05-2019) को "पत्थर के रसगुल्ले" (चर्चा अंक-3328) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
धन्यवाद । शास्त्री जी ।

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