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Showing posts from May, 2019

मुक्त मुक्तक : 899 - ग़ुस्सा

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मेरे ग़ुस्से को फूँक - फूँक मत हवा दे तू ।। मैं भड़क जाऊँ उससे पहले ही बुझा दे ।। मैं बरस उट्ठा तो दुनिया बहा के रख दूँगा , अब्र को मेरे नीला आसमाँ बना दे तू ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापति

मुक्त मुक्तक : 898 - ज़ुर्म

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ज़ुर्म वो साज़िशन रोज़ करते रहे ।।
दूसरे उसका ज़ुर्माना भरते रहे ।।
ज़ख़्म तो फूल ही दे रहे थे मगर ,
सारा इल्ज़ाम काँटों पे धरते रहे ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

मुक्त मुक्तक : 897 - मैं कहाँ हूँ ?

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दिख रहा सबको वहीं बैठा जहाँ हूँ ।।
हूँ वहीं पर वाँ मगर सचमुच कहाँ हूँ ?
दिल मेरा आवारगी करता जिधर है ,
दरहक़ीक़त मैं यहाँ कब ? मैं वहाँ हूँ ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति