मुक्त मुक्तक : 895 - मुस्कुराहट


लोग कहते हैं मैं मुस्कुराता नहीं ।।
मैं ये कहता हूँ मैं कुछ छुपाता नहीं ।।
हर तरफ़ मुश्किलें , बंद राहें सभी ;
कौन ऐसे में फिर मुँह बनाता नहीं ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (29-04-2019) को "झूठा है तेरा वादा! वादा तेरा वादा" (चर्चा अंक-3320) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
धन्यवाद , शास्त्री जी ।
Anita saini said…
बेहतरीन आदरणीय
सादर
धन्यवाद ! अनीता सैनी जी ।

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