मुक्त मुक्तक : 888 - भगवान बिक रहा है


   क्या क्या न इस जहाँ में सामान बिक रहा है ?
   बकरा कहीं ; कहीं पर इंसान बिक रहा है ।।
   हैरान हूँ कि सब कुछ महँगा यहाँ है लेकिन ,
   सस्ता दुकाँ दुकाँ में भगवान बिक रहा है ।। 
   -डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे