मुक्त मुक्तक : 884 - प्रेम


पूर्णतः करते स्वयं को जब समर्पित !!
प्रेम तब बैरी से कर पाते हैं अर्जित !!
जान लोगे यदि गुलाबों से मिलोगे ,
पुष्प कुछ काँटों में क्यों रहते सुरक्षित ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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