मुक्त मुक्तक : 882 - कुत्ता



गर्दिश तक में कुत्ता भी आराम से सोता है !!
मीठे ख़्वाबों के दरिया में लेता गोता है !!
अहमक इंसाँ ख़ुशियों में भी करवट बदल बदल ,
बिस्तर पर सब रात बैठ-उठ रोता-धोता है !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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