Thursday, March 22, 2018

मुक्त मुक्तक : 882 - कुत्ता



गर्दिश तक में कुत्ता भी आराम से सोता है !!
मीठे ख़्वाबों के दरिया में लेता गोता है !!
अहमक़ इंसाँ ख़ुशियों में भी करवट ले-लेकर ,
बिस्तर पर सब रात ही बैठ-उठ रोता-धोता है !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...