मुक्त मुक्तक : 881 - बाँग


बाँग मुर्गे सी लगाओ जो 
जगाना हो तो !!
गाओ बुलबुल सा किसी को जो 
सुनाना हो तो !!
फाड़ चिल्लाओ गला 
चुप न रहो तुमको उसे ,
जो न आता हो अगर पास 
बुलाना हो तो !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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