मुक्त मुक्तक : 879 - अच्छी नहीं ज़रा भी.....



अच्छी नहीं ज़रा भी , है इस क़दर ख़राब !!
कहते हैं लोग मेरी है ज़िंदगी अज़ाब !!
दिन-रात इतनी मैंने पी है कि अब तो आह !
मेरी रगों में बहती ख़ूँ की जगह शराब !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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