मुक्त मुक्तक : 877 - गूँगी तनहाई.......


गूँगी तनहाई में चुपचाप जब मैं रहता हूँ !!
रौ में जज़्बातों की तिनके से तेज़ बहता हूँ !!
लिखने लगता हूँ मैं तब शोक-गीत रोता सा ,
या कभी हँसती हुई शोख़ ग़ज़ल कहता हूँ !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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