*मुक्त-मुक्तक : 873 - कच्ची मिट्टी



गलता बारिश में कच्ची मिट्टी वाला ढेला हूँ ॥
नेस्तोनाबूद शह्र हूँ मैं उजड़ा मेला हूँ ॥
देख आँखों से अपनी आके मेरी हालत को ,
तेरे जाने के बाद किस क़दर अकेला हूँ ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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