*मुक्त-मुक्तक : 861 - किसी उँगली से अपनी


खड़े हो , बैठ उकड़ूँ या कि औंधे लेट ; पर लिखना ॥
लिखे को काट कर या उसको पूरा मेट कर लिखना ॥
किसी उँगली से अपनी नाम मेरा तुम ज़रूर इक दिन ;
मेरे चेहरे पे , सीनो पुश्त पे जी – पेट भर लिखना ॥
( पर = परंतु , सीनो पुश्त = छाती और पीठ , जी = तबीअत )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे