*मुक्त-मुक्तक : 860 - हैं भूखे हम बहुत

नहीं ख़स्ता कचौड़ी के , नहीं तीखे समोसे के ॥
नहीं तालिब हैं हम इमली न ख़्वाहिशमंद डोसे के ॥
न लड्डू , पेड़ा , रसगुल्ला ; न रबड़ी के तमन्नाई ;
हैं भूखे हम बहुत लेकिन तुम्हारे एक बोसे के ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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