*मुक्त-मुक्तक : 853 - तड़पूँ तुम्हारे वास्ते


तड़पूँ तुम्हारे वास्ते , न आह अब भरूँ ॥
हूँ तो निसार अब भी पर न पहले सा मरूँ ॥
विस्मृत नहीं किया है किन्तु ये भी सत्य है ,
अब नाम का तुम्हारे जाप मैं नहीं करूँ ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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