Saturday, July 16, 2016

मत हँसें !



[ चित्र google search /http://www.express.co.uk/से साभार ] 
चाहकर भी हो न पाते छरहरे , हम पे क़ुदरत का है ये ज़ुल्मो-सितम ॥ 
हम पे हँसने की जगह करना दुआ , कैसे भी हो ? हो हमारा वज़्न कम ॥ 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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