*मुक्त-मुक्तक : 852 - दया , करुणा , अहिंसा





हाँ दया , करुणा , अहिंसा का सतत उपदेश दे ॥
किन्तु मत प्रकृति विरोधी रात - दिन उपदेश दे ॥
वृद्ध हो , भूखा हो तेरा दास भी हो तो भी मत ,
घास चरने का कभी भी शेर को आदेश दे  ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति



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