*मुक्त-मुक्तक : 844 - कैसा वो दरिया ?





कैसा वो दरिया जिसमें न होवे है रवानी ?
कैसा वो कृष्ण जिसकी न मीरा हो दीवानी ?
बेइश्क़ ही गुज़र रही हो जो तो फिर वो उम्र ,
बचपन है या बुढ़ापा है हरगिज़ न जवानी ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति




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