ग़ज़ल : 197 - अच्छा नहीं किया हमने ॥



हाँ ; दवा-दारू , न ज़हराब ही पिया हमने ॥
ज़ख्म बढ़ता ही रहा फिर भी नाँ सिया हमने ॥
इतने तो भूखे रहे हम कि जब मिला पानी ,
हमने रोटी सा चबाया नहीं पिया हमने ॥
उसने वो बेच दिया अपने फ़ायदे भर को ,
बेच ख़ुद को जो उसे तोहफा दिया हमने ॥
फ़ौज में आए हैं हम रोज़गार को सच-सच ,
ठेका मरने का वतन पे नहीं लिया हमने ॥
कल जो हमने था किया एक काम अच्छा ही ,
आज लगता है वो अच्छा नहीं किया हमने ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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