*मुक्त-मुक्तक : 842 - लेना सबक ज़रूर.....




भूले न फटकता था कभी पास जो मेरे ,
क्यों वक़्त वो निकाल के अब रोज़ ही आता ?
ऐसा नहीं कि उसको मैं अच्छा लगा करूँ ,
ये भी नहीं कि उसको मेरा हुस्न लुभाता !!
हैरत न खाना आप सबब इसका जानकर ,
लेना सबक ज़रूर इसको सच ही मानकर ,
जाना है जबसे उसने ये कि मैं तो मोम हूँ –
कुछ धूप , थोड़ी आँच रखके साथ में लाता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे