*मुक्त-मुक्तक : 833 - नर्म बाँहों में.......

हाथ में झट हाथ मेरा धर लिया उसने ॥
नर्म बाँहों में फटाफट भर लिया उसने ॥
इश्क़ के इज़हार का ढंग सोचता ही था ,
आ के इक़रारे मोहब्बत कर लिया उसने ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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