*मुक्त-मुक्तक : 831 - रक्त का चूषक

स्वच्छ-कर्ता को महा दूषक बना देता ॥
दुग्धप्रिय को रक्त का चूषक बना देता ॥
सिर-मुकुट को पाँव की चप्पल बना डाले ,
काल क्षण में हस्ति को मूषक बना देता ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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