*मुक्त-मुक्तक : 828 - अजगर बड़ा ॥


एक चूहे के लिए छोटा सा भी अजगर बड़ा ॥
ज्यों किसी हाथी को भी हो शेर-ए-बब्बर बड़ा ॥
ख़ूब सुन-पढ़ के भी जो हमने कभी माना नहीं ,
इश्क़ में पड़कर वो जाना , है ये गारतगर बड़ा ॥
( शेर-ए-बब्बर = बब्बर शेर , गारतगर = विनाश करने वाला )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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