*मुक्त-मुक्तक : 826 - जोड़-तोड़ कर

जोड़-तोड़ कर जैसे-तैसे इक घर बनवाया ॥
पर प्रकृति को मेरा यह निर्माण नहीं भाया ॥
रात अचानक जब घर में सब सोए थे सुख से ,
छोड़ मुझे कुछ भी न बचा ऐसा भूकंप आया ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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