*मुक्त-मुक्तक : 819 - कोयल की कूक

कोयल की कूक वानरी किट-किट भी मुझमें है ॥
मुझमें कहीं धड़ाम भी चिट-चिट भी मुझमें है ॥
किरदार से शफ़्फाक हंस हूँ मगर सुनो ,
हालात के मुताबिक़ गिरगिट भी मुझमें है ॥
( किरदार = चरित्र , शफ़्फाक = उजला , हालात= परिस्थिति  )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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