*मुक्त-मुक्तक : 818 - मुझपे करना ज़ुल्म


मुझपे करना ज़ुल्म सारे , रात – दिन करना जफ़ा ॥
खुश न रहना मुझसे चाहे रहना तुम हरदम ख़फ़ा ॥
गालियाँ भी जितना जी चाहे मुझे बकना मगर ,
इक गुज़ारिश है कभी कहना मुझे मत बेवफ़ा ॥

डॉ. हीरालाल प्रजापति

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