*मुक्त-मुक्तक : 815 - सायों की तरह से ॥



भूले से भूखे शेर से गायों की तरह से ॥
घनघोर अंधकार में सायों की तरह से ॥
लगता ज़रूर अजीब है लेकिन है हक़ीक़त ,
मिलता है अपनों से वो परायों की तरह से ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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