*मुक्त-मुक्तक : 810 - किसकी है वह ?



मूर्ति मन मंदिर में मेरे माप की बैठी रही ॥
चाहता था जैसा मैं उस नाप की बैठी रही ॥
पूछते हो किसकी है वह ? और किसकी हो सके ?
आप की बस आप की बस आप की बैठी रही ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


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