*मुक्त-मुक्तक : 808 - धूल - मिट्टी की जगह......




धूल - मिट्टी की जगह सीम या ज़र हो जाता ॥
तुच्छ झींगे से मगरमच्छ ज़बर हो जाता ॥
ख़ुद को महसूस हमेशा ही तो नाचीज़ किया ,
अपने कुछ होने का अहसास अगर हो जाता ॥
( सीम या ज़र = सोना या चाँदी , ज़बर = शक्तिशाली )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


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