*मुक्त-मुक्तक : 806 - शराफ़त का लिबास



हमने जैसे ही पहना नेकी-शराफ़त का लिबास ,
दुनिया बदमाशियों पे हो गई उतारू सब ॥
हमने ज्यों ही उतारा मैक़शी के दामन को ,
लोग पीने लगे बग़ैर प्यास दारू सब ॥
उनको कहते हैं लोग शहर का बड़ा नेता -
सिर पे टोपी लपेटते गले में वो मफ़लर ,
हम जो दफ़्तर में सैंडल पहन के क्या पहुँचे ,
उसको कहने लगे फटाक से गँवारू सब !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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