*मुक्त-मुक्तक : 801 - अमरबूटियाँ



कौन यह जानता नहीं कि काया नश्वर है ?
सबका जीवन यहाँ पे जल का बुलबुला भर है ॥
फिर भी क्यों स्वप्न सँजोता है सदियों सदियों के ,
जैसे आया वो अमरबूटियाँ गुटक कर  है ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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