*मुक्त-मुक्तक : 796 - उड़ते अपनी शान से ॥



आस्माँ पर सब परिंदे 
उड़ते अपनी शान से ॥
मछलियाँ पानी में तैरें 
इक अलग ही आन से ॥
दौड़ें , कूदें , नृत्य भी हैं 
केंचुवी इंसान के ,
चल सकेगा क्या कभी ये
 पूरे इत्मीनान से ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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