*मुक्त-मुक्तक : 792 - न कह उसको तू ‘तू’ ॥




वो इक शेर है कोई हरगिज़ न आहू ॥
उसे आप ही कह न कह उसको तू तू
कभी मेरे किस्सों का किरदार था वो ,
मेरी शायरी का रहा है वो मौजू ॥
( आहू=हिरण , किरदार=चरित्र ,शायरी=कविता ,मौजू=विषय )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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