*मुक्त-मुक्तक : 788 - आँख लड़ी !!





फ़िदा उसी पे होने दिल अड़ा ये जान अड़ी !!
कि जिसकी फोड़ना था आँख उसी से आँख लड़ी !!
हसीं के साथ ही मासूम भी इतना था अदू ,
बजाय सख़्त कराहत के मुहब्बत उमड़ी !!
( अदू = शत्रु ,कराहत = घृणा )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति



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