*मुक्त-मुक्तक : 786 - तेरे हिज़्र में






आता नहीं तू याद फिर भी याद करूँगा ॥
आती हँसी है तब भी सिर्फ़ आह भरूँगा ॥
वादा जो कर लिया है तुझसे तेरे हिज़्र में ,
जब तक जिऊँगा तेरे ही लिए मैं मरूँगा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


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