*मुक्त-मुक्तक : 784 - नींद भर का ख़्वाब

एक ही जाम में सौ ख़ुम भरी शराब दिखे ॥
एक जुगनूँ में ही दोपहरी आफ़्ताब दिखे ॥
एक मुद्दत से नहीं सोया इसलिए चाहूँ ,
एक झपकी में पूरी नींद भर का ख़्वाब दिखे ॥
( जाम=प्याला , ख़ुम=मटका, आफ़्ताब=सूर्य , मुद्दत=अर्सा )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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