*मुक्त-मुक्तक : 783 - दो ख़बर ॥


झूठ है , झूठ है , 
झूठ है हाँ मगर ॥
दोस्तों-दुश्मनों 
सबको कर दो ख़बर ॥
कम से कम मुंतज़िर 
मेरी मैयत के जो ,
उनसे कह दो कि मैं 
कल गया रात मर ॥
( मुंतज़िर = प्रतीक्षारत , मैयत = मृत्यु )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक