*मुक्त-मुक्तक : 782 - चने नहीं चबाना है ॥




लाल मिर्ची औ बस चने नहीं चबाना है ॥
सोने – चाँदी के पेट भरके कौर खाना है ॥
आज रहता हूँ मैं फ़ुटपाथ पे कल मुझको मगर ,
रहने को घर नहीं ब ख़ुदा महल बनाना है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति




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