*मुक्त-मुक्तक : 778 - निगाहें रखना ॥





खोल के अपनी बंद - बंद ये बाहें रखना ॥
मरते दम तक मेरी राहों पे निगाहें रखना ॥
मैं न आऊँगा अबकी बार जो गया तो यहाँ ,
फिर ज़माने तू मेरी कितनी भी चाहें रखना ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति




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Welcome Sir Hiralal Ji, Plz come.
गाडरवारा- साहित्य सृजन परिषद के तत्वाधान में सार्वजनिक पुस्तकालय के तिलक भवन में 7 नवम्बर, शनिवार को रात्रि 8:30 बजे काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है । जिसमें साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी सादर आमंत्रित हैं । उक्ताशय की जानकारी साहित्य सृजन परिषद के अध्यक्ष रोहित रमन ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से प्रेषित की ।
वाह! हीरालाल प्रजापति जी लगता है आप
पहली बार निर्णय की मुद्रा में हुए हैं |आप
के इस आग्रह पूर्ण रचना के हेतु धन्यवाद !

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