*मुक्त-मुक्तक : 773 - साफ़-सुथरे ख़्वाब

सुधारता रहूँगा भूल पर मैं भूल अपनी ॥
न पड़ने दूँगा आँख में घुमड़ती धूल अपनी ॥
रखूँगा साफ़-सुथरे ख़्वाब हमेशा ज़िंदा ,
न होने दूँगा तमन्ना कभी फिज़ूल अपनी ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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