नवगीत : 38 - सुए से फोड़ लें आँखें ?

जो पढ़ना चाहते हैं वैसा क्यों लिखता नहीं कोई ?
जो तकना चाहते हैं वैसा क्यों दिखता नहीं कोई ?
कि पढ़ना छोड़ ही दें या सुए से फोड़ लें आँखें ?
कोई अपनों में दिखता ही नहीं मन मोहने वाला ,
कोई मिलता नहीं पूरा हृदय को सोहने वाला ,
करें क्या शत्रु को मन भेंट दे दें , जोड़ लें आँखें ?
नहीं लगता असाधारण हमें क्यों उसका अब व्यक्तित्व ?
कड़ा संघर्ष कर जिस पर स्थापित कल किया स्वामित्व ,
दरस को जिसके मरते थे लगे अब मोड़ लें आँखें ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Jagdish Kinjalk said…
राष्ट्रीय ख्याति के अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकें आमंत्रित
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भोपाल। साहित्य सदन भोपाल द्वारा राष्ट्रीय ख्याति के अठारहवें अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों हेतु साहित्य की अनेक विधाओं में पुस्तकें आमंत्रित की जाती हैं । उपन्यास, कहानी, कविता, व्यंग एवं निबन्ध विधाओं पर प्रत्येक के लिये इक्कीस सौ रुपये राशि के पुरस्कार प्रदान किया जायेंगे। दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकों की दो प्रतियाँ, लेखक के दो छाया चित्र एवं प्रत्येक विधा की प्रविष्टि के साथ दो सौ रुपये प्रवेश शुल्क भेजना होगा ।हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकों की मुद्रण अवधि 1 जनवरी 2013 से लेकर 31दिसम्बर 2014 के मध्य होना चाहिये। राष्ट्रीय ख्याति के इन प्रतिष्ठापूर्ण चर्चित दिव्य पुरस्कारों हेतु प्राप्त पुस्तकों पर गुणवत्ता के क्रम में दूसरे स्थान पर आने वाली पुस्तकों को दिव्य-प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जायेगा। अन्य जानकारी हेतु मोबाइल नं. 09977782777, दूरभाष-0755-2494777 एवं ईमेल:jagdishkinjalk@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। पुस्तकें भेजने का पता है-श्रीमती राजो किंजल्क, साहित्य सदन , 145-ए, सांईनाथ नगर सी-सेक्टर, कोलार रोड, भोपाल-462042 । पुस्तकें प्राप्ति की अंतिम तिथि है 30 अक्टूबर 2015 । कृपया प्रेषित पुस्तकों पर पेन से कोई भी शब्द न लिखें ।
( जगदीश किंजल्क )
संयोजक: दिव्य पुरस्कार
साहित्य सदन,145-ए,
सांईनाथ नगर ,
सी-सेक्टर, कोलार रोड,
भोपाल-462042
संपर्क-09977782777

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