*मुक्त-मुक्तक : 761 - आस्मान को पाना ॥


[ चित्रांकन : डॉ. हीरालाल प्रजापति ]

आपको जानके शम्आ न होता पर्वाना ॥
इश्क़ में आपके होता न मैं जो दीवाना ॥
दफ़्न रहके भी मैं ज़मीन में रह लेता ख़ुश ,
मुझको लाज़िम न होता आस्मान को पाना ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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