*मुक्त-मुक्तक : 760 - तुझे बेदख़्ल कर दूँ.......




[चित्रांकन : डॉ. हीरालाल प्रजापति ]

मुनासिब है हटा दूँ तुझको अपने जेह्न-ओ-दिल से ॥
तुझे बेदख़्ल कर दूँ अपनी तनहाई-ओ-महफ़िल से ॥
इसी में अक़्लमंदी है अगर है सिर्फ़ नुक़्साँ ही ,
ज़माने भर से लेकर दुश्मनी इक तेरे हासिल से ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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