*मुक्त-मुक्तक : 742 - आबोदाना ॥



[ चित्रांकन : डॉ. हीरालाल प्रजापति ] 
लिक्खा जहाँ पे होता क़िस्मत में आबोदाना ॥
ना चाह के भी सबको पड़ता वहाँ पे जाना ॥
मर्ज़ी का सबको मिलता ना रोज़गार याँ पे ,
भरने को पेट जैसा चाहें मिले न खाना ॥
(आबोदाना=रोज़ीरोटी,खाना=भोजन)
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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