*मुक्त-मुक्तक : 755 - बारात में हूँ मैं !!




तुम न जानोगे कि किन 
हालात में हूँ मैं ?
गिन नहीं पाओगे जिन 
आफ़ात में हूँ मैं !!
चल रहा हूँ जिस तरह से 
तुम न समझोगे ,
हूँ जनाज़े में या फ़िर 
बारात में हूँ मैं !!
( हालात=परिस्थितियाँ ,आफ़ात=मुसीबतें ,जनाज़े=मैयत )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति



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