*मुक्त-मुक्तक : 753 - सदाएँ रोज़ आतीं हैं ?


[ चित्रांकन : डॉ. हीरालाल प्रजापति ]

हौले - हौले नींद से जैसे जगाती हैं ॥
जानता हूँ वो मुझे ही तो बुलाती हैं ॥
पंख होते तो मैं फ़ौरन ही न सुन लेता ,
आस्माँ से जो सदाएँ रोज़ आतीं हैं ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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