*मुक्त-मुक्तक : 752 - ग़मज़दा कर दें ॥






मस्जिदों, कुछ बुतकदों को मैकदा कर दे ॥
कुछ फ़रिश्तों को ख़तरनाक इक ददा कर दे ॥
खुशमिजाज़ आशिक़ को हद से भी ज़ियादा जब ,
इश्क़ में नाकामयाबी ग़मज़दा कर दे ॥
( बुतकदों=मन्दिरों, मैकदा=मदिरालय, ददा=दरिंदा )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति




Comments

Popular posts from this blog

मुक्त-ग़ज़ल : 262 - पागल सरीखा

विवाह अभिनंदन पत्र

मुक्त-ग़ज़ल : 264 - पेचोख़म